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Tuesday, June 30, 2020

Maithili Baal Kavita


हमैथिली वाल कविता

हमसब छी एकहि


गोलु मोलु बच्चा–बुच्ची, ई दुनिया बड्ड अजुवा ।
माटिसँ बेसी पानि भरल, अजगुत बड्ड यो बौवा ।।

गोर–कारी लोक अनेक, खुनक रंग छै एकहि ।
लाल खुन बहए सबमे, बुझू बात आहाँ चोटहि ।।

लोकेटा नहि आनो प्राणी, भरल पडल छै एतऽ ।
सबहक बात सबकेओ बुझबै, मिलि हमसब रहबै एतऽ ।। 

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई, ई धर्मक नाम अनेक ।
अल्लाह, ईश्वर, नानक, जिसस, छै सबहक मतलब एक ।।


विदेश घुमबै देश बनेबै   २

पढबै लिखबै बनेबै देश, कहिओकाल घुमऽ जेबै विदेश ।
विदेश जेबै घुमबै फिरबै, देखि–सुनिकऽ एबै देश ।।

जापान चीन अमेरिका घुमबै, नीक चिज एतऽ अनबै ।
पेरिस लन्डन जर्मन जेबै, विकासक बात हम बुझेबै ।।

पडोसमे जाएब भारत घुमब, झोरा भरिकऽ सनेस आनब ।
चोर उचक्कासँ बचिकऽ रहब, अपन सुरक्षा अपने जानब ।।

कोरिया कतार मलेसिया जाएब, नीकनिकुत हम ओतऽ खाएब ।
अरब कुवेत हमसेहो जेबै, बड्ड गर्मीमे बचिकऽ रहबै ।।

देशक कथा सुनू   ३

ई छै हमर देश नेपाल, एकर कथा सुनू  ।
सुनू सुनू सुनू भैया, दिदी आहाँ सबगोटे सुनू ।।

जानकी छै, एहि देशक बेटी से बात सुनू ।
काका काकी ई देशक कथा आहाँ सबगोटे सुनू ।।

उच्च हिमालयके कोरामे रहै छी से बात सुुनू ।
दादा  दादी ई देशक कथा आहाँ सबगोटे सुनू ।।

कमला आ वलान बहै छै से बात सुनू ।
नाना नानी ई देशक कथा आहाँ सबगोटे सुनू ।।


सबसँ बढियाँ सबसँ सुन्दर  ४

सबसँ बढियाँ सबसँ सुन्दर इएह हमर ठाम यौ ।
नेपालमे छै मिथिला, मिथिलामे छै हमर गाम यौ ।।

हमर केरा हमर सरिफा हमरे अँत्ता आम यौ ।
नेपालमे छै मिथिला, मिथिलामे छै हमर गाम यौ ।।

हमर दाहा हमर झण्डा हमरे सब सरजाम यौ ।
नेपालमे छै मिथिला, मिथिलामे छै हमर गाम यौ ।।

हमर तोता हमर मैना हमरे रहीम–राम यौ ।
नेपालमे छै मिथिला, मिथिलामे छै हमर गाम यौ ।।


बढए सबके मान–सम्मान  ५

हिमाली पहाडी आ मधेशी केओ नहि छै आन ।
काज एहन करी जे बढए सबके मान–सम्मान ।।

पूव–पश्चिम उत्तर–दक्षीण पसरए चहुँदिसि शान ।
काज एहन करी जे बढए सबके मान–सम्मान ।।

मेची–काली सौंसे पसरल ई हमर देश महान ।
काज एहन करी जे बढए सबके मान–सम्मान ।।

नेपालीसब मिलि कऽ रही ककरो नहि जाए जान ।
काज एहन करी जे बढए सबके मान–सम्मान ।।


कनियाँ –पुतरा ६

कतेक सुन्नरि हम्मर कनियाँ, नाकमे हिनकर झुलनि नथनियाँँ ।
पहिरिकऽ ललका नूआ देखू, सासुर चललीह नवकी कनियाँँ ।।

कनियाँ बैसलीह जा महफापर, चलल कहरिया बरक घर ।
संगमे बहुतो छैक सनेस, खाजा, मुङबा, अहिबक फर ।।

केश बान्हिकऽ  कएलनि काजर, डाँडमे झटपट खाँेसलनि आँचर ।
वर–कनिया मिलि सम्हारथि,  घर अङना चौरी चाँचर ।।

केहन रहैए साफ आ सुथरा, हमरासबहक कनियाँ–पुतरा ।
आबै सभकेओ मिलिकऽ खेली, पलटु, सुनीता, मोहन, धुथरा ।।

सञ्चार ७

सुनू सुनू यौ बाबु भैया, सुनियौ हमर बात ।
सुनियौ जनियौ गमियौ, आब ई कम्प्यूटरक बात ।।

धुरा गर्दा खेलब छोडू, गुनु बुझु सञ्चार यौ ।
गुल्ली डण्डा धन्धा छोडू, आब पढू अखवार यौ ।।

सारा विश्व बन्हल छै, बुझू ई इन्टरनेटक डोरीमे ।
कथा कविता खिस्सा पिहानी, सब छै एकरे झोरीमे ।।

छोडू अमेरिका चाइना भारत, आब सब छै एकहि ठाम ।
बड अछि अजगुत बात ई विश्व बनल एक ग्राम ।।

रुनु–झुनु ८

केश खोकरी चोटी बान्ही, विन्दी सजए हमर ।
रुनु–झुनु रुनु–झुन,ु पायल बाजए हमर ।।

धुरा गन्दा नहि खेलेब,ै साफ रखबै डघर ।
रुनु–झुनु रुनु–झुनु पायल बाजए हमर ।।

नवका कपडा हम पहिरबै, फेंकबै पुरना जम्फर ।
रुनु–झुनु रुनु–झुनु, पायल बाजए हमर ।।

किताब लेबै पेन्सिल लेब,ै सँगमे रखबै कटर ।
रुनु–झुनु रुनु–झुनु, पायल बाजए हमर ।।




Thursday, August 3, 2017

Tilathi Flood/NT

सीमान्त तिलाठीमा बाढीको कहर

धर्मेन्द्र झा

पूर्वी नेपालको दक्षीणी सीमामा अवस्थित तिलाठी क्षेत्र अहिले आक्रान्त बनेको छ । आक्रान्त हुनुको कारण हो बाढीको कहर । यस क्षेत्रका तिलाठी, लौनियाँ, वेल्ही, रमपुरा, विसहरिया, मल्हनियाँ, सकरपुरा, कोइलाडी र भारदहनजिकको मयनाकरडीलगायतका क्षेत्रको जनजीवन अहिले बाढीका कारण अस्तव्यस्त बन्न पुगेको छ । गत वर्ष यही समयमा तिलाठीका जनताले बाढीको कहरबाट पार पाउन टाउकोमा गम्छा बाँध्दै हातले लाठी नचाउनुुपर्ने अवस्थाको सिर्जना भएको  स्मरणीय छ ।

Monday, December 19, 2016

Mithila Federal/GOPA

मिथिला संघीयताको जनकपुर सन्देश
धर्मेन्द्र झा

संविधान कार्यान्वयन प्रक्रियासँगै देशमा सुरु भएको संघीयता सीमाकंनको वहसले अहिले नयाँ रुप लिएको छ । यो वहस कतै न कतै राष्ट्रियताको नयाँ परिभाषा र यसको प्रवद्र्धनसँग पनि सम्बन्धित छ । सरकारले संसदमा संविधान संशोधन प्रस्ताव दर्ता गराएपछि यो वहसले थप तीव्रता प्रााप्त गरेको अनुभव गरिएको छ । नेकपा एमाले, जो प्रमुख प्रतिपक्षी हो, ले राष्ट्रियतासँग जोडेर यस प्रस्तावको विरोध गरिरहेको छ भने मधेशकेन्द्रित दल, जसको असन्तुष्टि सम्बोधन गर्न प्रस्ताव ल्याइएको हो, पनि प्रस्तावप्रति सकारात्मक देखिएको छैन । यसरी उत्पन्न विरोधका श्वरहरुले यतिखेर राष्ट्रिय राजनीतिलाई नराम्ररी गाँजेको छ । एउटा कुरा के स्वीकार्नु जरुरी छ भने विरोधका यी श्वरहरुका कारण दलबीचको दुरी क्रमशः बढिरहेको छ । दलबीच अनुभूत गरिएको यही दूरी कम गर्नु अहिलेको मुख्य राजनीथिक कार्यसूची हो भनियो भने त्यो असत्य हुने छैन । यसका लागि संवादको औचित्य स्वीकारिनु अपरिहार्य  छ ।

Friday, November 4, 2016

Maha Parv Chhath/Blog&BT

  सांस्कृतिक एकताको प्रतीक बन्दै छठ

धर्मेन्द्र झा

देशभित्र त्यस्ता थुप्रै सांस्कृतिक अवयव छन् जसले देशलाई एकतासूत्रमा आवद्ध गर्न मद्दतमात्र पुर्याउँदैन समग्र राष्ट्रियता प्रवद्र्धनमा पनि निर्णायक भूमिका निर्वाह गर्न सक्छ÷गर्दछ । त्यस्तै एउटा प्रतीक हो महपर्व छठ । प्रत्येक वर्ष शुक्ल षष्ठी (प्रदोस षष्ठी)को साँझ र सप्तमाीको विहान सूर्यलाई अघर््य दिई मनाइने यो पर्व चार दिने अनुष्ठान हो । सदा झै यस वर्ष पनि यो पर्व प्रारम्भ भइसकेको छ । शुक्रवार नुहाइ धुवाई अर्थात् शुद्ध हुने क्रमबाट प्रारम्भ भएको यो पर्वअन्तर्गत पर्वको आइतवार मुख्य अनुष्ठानको आयोजना हुँदैछ । पर्वअन्तर्गत शनिवार खरना अर्थात् व्रतालुद्वारा व्रतको प्रारम्भ हुनेछ । सोमवार सूर्यदेवलाई विहानको अघर््य अर्पण गर्दे पारनको आयोजनापश्चात पर्व समापन हुनेछ ।

Sunday, August 16, 2015

गोनु झाक कथा/Maithili



गंगा—स्नान

धर्मेन्द्र विह्वल

मिथिलामे विगतसँ वर्तमानधरि गंगा—स्नानक आध्यात्मिक प्रचलन रहिआएल अछि । गंगास्नान केलासँ ओहि अवधिधरिक पापक प्रायश्चित होइत अछि से विश्वास अद्यावधि कायम अछि ।
एकवेरक वात अछि । गामक महिलालोकनि गंगास्नानहेतु सिमरिया (भारतक वरौनीलग)जेवाक तयारी कऽरहल छलीह । ई देखि गोनुपत्नीक मोनमे सेहो सिमरियिा जेवाक इच्छा जागृत भेलनि । गामक महिलालोकनिकेँ प्रत्येक वर्ष सिमरिया जाइत देखि गोनुपत्नीमे सेहो सिमरियाक इच्छा जागृत हएव स्वाभाविक छल । आन महिलालोकनि हुनका व्यग्ंयसेहो मारैत जाइत छलीह—आहाँ किएक जाएव ? आहाँक सव पाप तँ गोनुए वावु प्राश्चित कऽ दैत छथि । आहाँक लेल घरे गंगासँ पैघ अछि । एहन वातसव सुनि हुनका नीक तँ नहि लगैत छलनि । मुदा गोनु वावुक स्वीकृतिविना ओ कतहु वहराइयो तऽ नहि सकैत छलीह । सँगी वहीनपासँग ओ एहिसम्वन्धमे खुलि कऽ वाजियो नहि सकैत छलीह । मुदा एहिवेर गंगास्नानक लेल पतिसँग अनुमति लेवाक नियार कऽ लेने छलीह आ एहिहेतु कोनो युक्तिक जोगाडमे छलीह ओ । प्रस्ताव वढविते स्वीकृति प्राप्त करवामे सहज हुअए से अनुकूल समयक प्रतीक्षामे ओ रहऽ लगलीह । मुदा एहन अवसरि हुनका भेट नहि रहल छलनि ।

Politics/Madhesh


आन्दोलनमे नेताक नहि जनताक सहभागिता चाही

देश अखन एक प्रकारक संक्रमणमे अछि आ संक्रमण विविध आयाम आ स्वरुपमे उपस्थित अछि । देशसोझाँ राजनीतिक संक्रमण तँ विगत एक दशकसँ उपस्थित अछिए सँगहि अखन आनतरहक संक्रमण आ समस्यासेहो विद्यामान भऽगेल अछि । एहिमे प्रमुख अछि, प्राकृतिक आपदा । नव वर्ष २०७२ क प्रारम्भक सँगहि वैशाख १२ आ  २९ गते आएल विनाशकारी भूकम्प देशक भूगोलकेँ हिला देलक । भूकम्प देशेकेँ टा नहि अपितु लोकक मोन आ मस्तिष्ककेँ सेहो अन्तरसँ जर्जर बनादेलक । बात एतहि नहि खतम भेल । ई विपदासँ लोक निकजकाँ उवरि नहि पाएल छल कि दोसर प्राकृृतिक डाँग सहवालेल लोक बाध्य भेल । ई डाँग छल सुखा आ रौदीक । ई तीनु समाजलेल संंक्रमणक रुपमे उपस्थित भेल अछि जाहिसँ उवरव लोकहेतु सहज नहि भऽ रहल छैक ।

Wednesday, January 28, 2015

Maithili/गोनु झाक कथा



गोनुक चारि अँगुरिया लाठी
धर्मेन्द्र विह्वल
गोनु झा लाठी बनेबामे बेस निपुण मानल जाइत छलाह । हुनक बनाएल लाठी बहुत प्रसिद्ध रहए । हुनक ई गुणक चर्चा गामगामधरि पसरल छल । लगपासक गामक लोकसभ सेहो लाठी बनबाबऽहेतु आवश्यक काठ—बाँस लऽ गोनु बाबुलग अबैत जाइत छल । गोनु बाबु उदारमना छलाह । ओ ककरो दुखित नहि बनबऽ चाहैत छलाह । ओ लाठी बना देबाक आश्वासन दऽ काठ—बाँस राखि सभकेँ घुरबैत छलाह । इएह कारण छल जे गोनुबाबुक ओसरासँ सटल कोठली एहन काठ—बाँससँ भरल पडल छल ।

Mithila in Federalism

संघीयतामे मिथिलाक स्थान


२०७१क माघ ८ आमलोकहेतु वहुप्रतिक्षित छल । एहिदिन देशक नव संविधान एबाक छलैक, मुदा से नहि भऽ सकलैक । पहिल संविधानसभा विनुसंविधान देनहि कालकलवित भऽगेल पृष्ठभूमीमे सम्पन्न भेल दोसर संविधानसभाक निर्वाचनक सन्दर्भमे आ तत्पश्चात राजनीतिक दलसभ एक वर्षक भितर संविधान देबाक बात कबोल केने रहए । एतबए नहि, संविधानसभाक कार्यसुची तयार करबाकाल माघ ८ मे संंविधान घोषणा करबाक तिथिक पूर्वनिर्धारण सेहो  राजनीतिक दल स्वयं केने रहए । मुदा से नहि भऽसकल आ पूर्वनिर्धारित समयमे संविधान देबाक काजमे दलसभ असफल प्रमाणित भेल । एकर जिम्मेवारी आब के लेत ?
 ई यक्ष प्रश्न आब सभकसोझाँ ठाड अछि । एकर उत्तर देबाक क्रममे राजनीतिक दल एकदोसरापर आरोप—प्रत्यारोप मढिरहल अछि । ई आरोप—प्रत्यारोपमे मधेशकेन्द्रीत दल सेहो संलग्न अछि । विगत ०६३÷०६४क मधेश आन्दोलन देशमे संघीयताक मुद्दा स्थापित केने छल । एहिमे शंका नहि । मुदा एखन इएह मुद्दा ओझराएलसन बुझाइत अछि । मधेश भौगोलिकरुपसँ एकहि रंगक बुझाइत अछि ई फराक बात अछि, मुदा एकटा बात स्वीकार करहि पडत जे मेचीसँ महाकालीधरि पसरल मधेश भूमि पृथक—पृथक सांस्कृतिक माटि—पानिसँ पोसित अछि । ई बात मुलतः बुझनाई आवश्यक अछि । मुदा, मधेशकेन्द्रीत नेतालोकनि ई बात बुझबालेल कहियो तयार नहि भेलाह आ भावनामे बहि माओवादीक जातीय राज्यक व्यूहमे फँसि गेलाह । एकटा बात बुझऽ पडत जे माओवादी एहि देशमे उग्रवामपन्थक नेतृत्व करैत अछि जे सिद्धान्ततः संघीयताविरोधी अछि, ओ लोकतन्त्रपर विश्वास नहि करैत अछि । आ इहो बुझऽ पडत जे मधेशक नेता अधिकांशतः लोकतन्त्रवादी छथि आ संघीयता हुनक मुद्दा अछि । संघीयताकेँ सहजहिँ कार्यान्वयन होवऽ दऽ कांग्रेस, एमाले आ माओवादीलगायतक गैरमधेशवहुल नेतासभक दल मधेश मुद्दाकेँ स्थापित होइत नहि देखऽ चाहैत अछि । ई बात सत्य अछि । इएह कारण अछि, माघ ८ मे संविधान नहि आएल । एहि तिथिमे मधेशी शक्तिकेँ छोडि आन कोनो शक्ति संविधान लौबाक पक्षमे नहि छल । ओसभ बुझैत अछि, जे मधेश जेना संघीयता चाहैत अछि तहिना संघीयता जँ आबि जाए तँ मधेश सुदृढ भऽ जाएत । आ ई बात ओसभ नहि चाहैत अछि । दोसर बात, संघीयताक सम्बन्धमे मधेशकेन्द्रीतसभसँग सेहो कोनो स्पष्ट दृष्टिकोण नहि अछि । ओसभ मधेशकेन्द्रीत संघीयताक आधार सांस्कृतिक विरासतकेँ नहि बनबऽ चाहैत अछि । इएह कारण छैक जे संघीयता निर्धारणहेतु सांस्कृतिक आधारक पक्षपातीसभ मूल मधेश अभियानसँ सनैसनः कटलकटलसन अवस्थामे देखल जाए लागल अछि । मधेश शक्तिसभहेतु ई विचारणीय पक्ष अछि ।

Thursday, June 12, 2014

जनकपुर जागृति

जनकपुर जागृति


अहिले जनकपुरमा जागृतिको अनुभव गरिएको छ । एशियाली बिकास बैंकको सहयोगमा संचालित एकीकृत सहरी बिकास योजनालाइ रोक्न हुँदैन भनेर दवाब सिर्जना गरिँदैछ । पौराणिक आध्यात्मिक महत्वको जनकपुरको प्रसिद्ध गंगाासागर पोखरी अहिले सफा भएको छ ।

सहरी विकास योजनाका पक्षमा दवाव सिर्जना गर्ने र फोहर गंगासागर सफा बनाउन योगदान दिने स्थानीय युवाहरुको सक्रियता सलामको हकदार छ । यसपटक कुरा जनकपुरको गंगासागरकै बारेमा । यो सागरको उत्पति यहाँ कसरी भयो त्यसको यकिन छैन तर निकै प्रचाीन यो पोखरी जनकपुर सभ्यताको निरन्तरको साक्षी हो भन्ने कुराको खण्डन पनि कसैबाट हुन सकेको छैन । जनकपुरवासीको मन मस्तिष्कमा अमीट छाप छोडिरहन सफल यो पोखरी प्राचीन कालमा राजा जनकले मिथिलावासीको वृहत कल्याणका लागि निर्माण गर्न लगाएका थिए भन्ने जनश्रुति विद्यमान छ ।

Tuesday, February 4, 2014

Maithili Politics/दोसर संविधानसभा आ सभासदक भूमिका

दोसर संविधानसभा आ सभासदक भूमिका

निर्वाचन सम्पन्न भऽ दोसर संविधानसभाक गठन सेहो भऽ चुकल अछि । इएह संविधानसभा पहिलुकेजकाँ संसदक हैसियतमे सेहो काज करत । बितलाहा अगहनक चारि गते देशभरि एकहिबेर प्रत्यक्ष निर्वाचनक माध्यमसँ एहि सर्वोच्च विधायिकामे प्रतिनिधित्व करबाहेतु दू सओ चालीस स्थानक लेल प्रत्यक्ष निर्वाचन सम्पन्न भेल । संविधानसभाक गठन प्रक्रियाकेँ जँ देखल जाए तँ एहिमे तीन तरहक प्रक्रियाक माध्यमसँ प्रतिनिधित्व कराओल जाइत अछि । पहिल माध्यम प्रत्यक्ष निर्वाचन अछि । दोसर माध्यम समानुपातिक प्रतिनिधित्व अछि । एकर संख्या तीन सओ ३५ अछि । एकरो पद विभाजन भऽ चुकल अछि । आ दनु प्रक्रियाक माध्यमसँ भेल प्रतिनिधित्वक परिणाम सबकेँ ज्ञात अछि । एहि सर्वोच्च विधायिकामे प्रतिनिधित्वक लेल मन्त्रिपरिषदद्वारा राष्ट्रिय जनजीवनमे ख्यातिप्राप्त आ संविधानसभामे प्रतिनिधित्व नहि भऽ सकल जनजाति आ आदिवासीसभसँ २६ गोटेकेँ मानेनित करबाक प्रावधान अछि । प्रतिनिधित्वक लेल ई तेसर माध्यम अछि । एहिहिसाबेँ देखल जाए तँ मन्त्रिपरिषदसँ एखनधरि ककरो मनोनयन नहि भेल हेबाक कारणे संविधानसभा एखनधरि पूर्णता नहि पओलक अछि । मुदा, दुर्भाग्ये कहल जाए, पूर्णता नहि पओलाक बादो संविधानसभा आ संसदक बैठक बैसि चुकल अछि । एतबए नहि कार्य (विजनेस) सेहो प्रारम्भ कऽ चुकल अछि । एकरा विडम्बने कहबाक चाही ।


देशभरि संघीयताक माग उठिरहल वर्तमान सन्दर्भमे गठित ई दोसर संविधानसभाक महत्व अत्यन्त बेसी अछि । मधेशक वासिन्दा आ आदिवासी जनजातिलगायत वर्षाेसँ उपेक्षित आ उत्पीडित नागरिकक पहिचान आ अधिकार सुनिश्चित करबाहेतु ई सभाक उपस्थितिकेँ अत्यन्त महत्वपूर्ण मानल गेल अछि । वास्तवमे कही तँ उएह पहिचान आ अधिकारक प्रत्याभूतिक श्वरक प्रकटीकरणक रुपमे ई सभाक गठनकेँ लेल जेबाक चाही । लेल गेल अछि ।  इतिहास साक्षी अछि, विगतक मधेश आन्दोलन ई सभाक गठनक औचित्यक मार्ग प्रशस्त करबामे सबसँ अधिक भूमिका निर्वाह केलक । ई सत्य अछि, ई कहब सर्वथा उचित हएत । मधेशक अधिकार सुनिश्चितताक माग करैत एतहुका वासिन्दा आन्दोलन केलनि । । आन्दोलनक इएह पृष्ठभूमिक आलोकमे संविधान सभाक पहिल निर्वाचन सम्पन्न भेल । आ एकरे सिढी बना किछुगोटेकेँ सत्ताधरि पहुँचबामे सफलता प्राप्त भेलनि । मधेश, निर्वाचनक माध्यमसँ मुख्य राजनीतिक शक्तिक रुपमे स्थापित भेल । विगतक इतिहास साक्षी अछि, मुदा ई शक्तिक प्रयोग जाहिरुपे मधेश कल्याणहेतु होबाक चाहैत छलैक । से नहि भऽ पओलैक । मधेश शक्तिक माध्यमसँ सत्तानिकट पहुँचल राजनीतिकर्मीद्वारा ई शक्तिकँे सत्ताप्राप्तिक दलालीक माध्यम बनाओल गेल । संविधानसभा जाहि उद्देश्यक लेल गठन भेल छल से पूरा नहि भऽ सकल । पहिल संविधानसभा भंग भेल । यद्यपि ई सभा भंग होबाक लेल आन राजनीतिक शक्तिसब मुख्य जिम्मेबार अछि । मुदा एक कटु यथार्थ इहो स्वीकार करऽ पडत जे एकरालेल मधेशक नेता आ राजनीतिक दलसब सेहो कम जिम्मेबार नहि अछि । पहिल संविधानसभामे मुलतः तीन टा राजनीतिक दलके मधेश जनादेश देने बात ककरोसँ छपित नहि अछि । मुदा ई दोसर क्रुर सत्य अछि जे पहिल संविधानसभाक भंगक समय अबैतअबैत ई तीन दल तेरहमे विभक्त भऽ गेल । कारण एकहि टा छल, सत्ताप्राप्तिक लौल । ई दलसबहक विभाजनक आधार नीतिगत आ सैद्धान्तिक नहि छल । फलतः मधेशमे ई राजनीतिक दलसब क्रमशः अलोकप्रीय होइत गेल आ मधेशक वासिन्दाबीच निराशा बढैत गेल । एहिबातक जनमत प्रकटीकरण संविधानसभाक दोसर निर्वाचनक माध्यमसँ भेलैक । एकरे परिणाम अछि, कल्हुका दिनमे मधेशमे अस्वीकृत राजनीतिक दलसबकेँ एहिबेर मुडी उठेबाक निक अवसरि प्राप्त भेलैक आ स्वीकृत राजनीतिक शक्तिक आगाँ पश्चाताप बोध करबाक अतिरिक्त आन कोनो विकल्प नहि बाँकी रहलैक ।  ई बात मधेशकेन्द्रीत दलसबकेँ बुझहिटा पडतैक । बोध करहि पडतैक । परिणाम सबहक सोझाँ छैक, मधेशकेन्द्रित राजनीतिक दलसबकेँ संविधानसभाक दोसर निर्वाचनक सन्दर्भमे अपेक्षित सफलता नहि भेटलैक । एकरा स्थानीय जनताक असन्तुष्टि व्यक्तक रुपमे बुझबाक चाही । प्रतिशतक आधारमे मतप्राप्तिक विश्लेषण कएल जाए तँ निराश होबाक अवस्था तँ नहि छैक मुदा स्थानक आधारपर विश्लेषण कएल जाए तँ संख्या थोड अछि । ई असन्तोषक बात अछि । आ विशिष्टीकृत रुपमे विश्लेषण कएल जाए तँ एकर मुल कारण अछि, स्वयंबीच स्वयंसँ प्रतिस्पर्धा । मधेशमे बहुतो एहन निर्वाचन क्षेत्र अछि जतऽ मधेशी दलकेँ स्वयं मधेशी दलसँ प्रतिस्पर्धा करऽ पडलैक । टूटफूटक स्पष्ट परिणाम छल ई । मधेशक दलपर मुद्दा विसर्जनक आरोप सेहो लगलैक । निर्वाचन अबैतअबैत एक मधेशक माग विभिन्न चीरामे विभक्त भऽ चुकल छल । पहिचान आ विकासक मुद्दा स्थापित करबामे सेहो ई दलसब असमर्थ रहल बात निर्वाचनक समयमे उठल छल । मधेश आन्दोलनक शहीद आ शहीद परिवारक अवहेलनाक सन्दर्भमे सेहो दलसब किछु कहबामे असक्षम छल । ई कोनो बातक स्पष्ट उत्तर देबामे ई दलसब असमर्थ पाओल गेल आ फलतः चुनावी प्रदर्शन कमजोर रहल ।

उपरुका विश्लेषणक आलोकमे कहल जा सकैत अछि जे बहुत राश एहन बात अछि जकर उत्तर मधेशक जनताक लेल अपेक्षित अछि । एतबए नहि मधेशक नेता आ दलसबकेँ सेहो अपन कार्यशैली परिवर्तनक सन्देश निर्वाचन देलक अछि । मुदा निर्वाचनक बादो कार्यशैलीमे परिवर्तनक संकेत नहि देखल जाएबला बात दुखद अछि । खास कऽ समानुपातिक प्रतिनिधि चयनक सन्दर्भमे बन्दरबाँटक जे शैली अपनाओल गेल आ जातीय, आर्थिक आ पारिवारिक जालपोलक फैलावट देखल गेल ताहिसँ मधेशक जनता फेर एकबेर मर्माहत होबाक अवस्था उत्पन्न भेल अछि । फेर एकबेर बुझारहल अछि दलसबद्वारा मधेशक मुद्दा विसर्जनक तैयारी भऽ रहल होइक । देखल जेबाक चाही तेसर प्रक्रियाक सन्दर्भमे हिनाकलोकनिक भूमिका केहन होइत अछि । मधेशक माग जातीय सन्दर्भसँ नहि जोडाइत अछि । ई तँ एक उन्नत परम्परा आ उदात्त परिचयक द्योतक थिक । मधेशक वस्तुस्थिति, इतिहास, सभ्यता, संस्कृति आ सामाजिक संरचना तथा विश्वासक सम्बन्धमे अल्प जानकारी रहल व्यक्तिकेँ मधेशक पहिचानक बात नव लागि सकैत अछि मुदा स्वयंमे ई बात नव नहि अछि । एकर लम्बा पृष्ठभूमि छैक । खास कऽ मधेशी दल आ नेतृत्वकेँ ई बात निकजकाँ बोध होबाक चाही । बोध हएब एहिद्वारे सेहो आवश्यक जे हिनकालोकनिकेँ कल्हुका दिनमे विधायिकामे तदनुकुलक भूमिका निर्वाह करबाक छन्हि । मधेश आन्दोलनक क्रममे बहुतो सपूतद्वारा शहादत प्रदान कएल गेल बात ककरोलेल अविश्स्मृत नहि होबाक चाही । दल आ नेतागणसँ उपेक्षाक अनुभूतिक बादो मधेशक जनताद्वारा मधेशी दल आ नेतसबपर एकबेर फेर विश्वास कएल गेल बात स्तुत्य अछि । एहुबेर सेहो मधेशी दलसबहक माध्यमसँ पचाससँ अधिक संख्यामे सर्वोच्च विधायिकामे प्रतिनिधित्व भेल अछि । आन दलक संख्या जँ जोडल जाए तँ ई संख्या सओसँ अधिक अछि । ई संख्याकेँ कमजोर नहि मानल जेबाक चाही । जँ ई प्रतिनिधिसब मधेशप्रतिक अप्पनअप्पन दायित्वकेँ स्मरण करैत भूमिका निर्वाह करथि तँ सभा हिल सकैत अछि आ मधेशकेँ यथोचित सम्मान भेटबामे कोनो कसरि नहि बाँकी रहि सकैत अछि ।

Friday, September 13, 2013

Gonu Jha


गोनु झाक कथा

बिलाडि दूध नहि पिबैए

                                     –धर्मेन्द्र विह्वल

मिथिलाक तात्कालीन नरेश विद्वान आ प्रतिभाशाली व्यक्तिसभकेँ अत्यन्त कदर करैत छलाह । ओ अप्पन दरबार विद्वानसभसँं सदति भरल रहए से चाहैत छलाह । एकबेरक बात अछि, नरेश अप्पन दरबारक कुशल आ चतुर व्यक्तिसभमेसँ चयन कऽ एकगोटेकेँ अप्पन सल्लाहकार नियुक्ति कर।बाक सोच बनौलन्हि । चयनक लेल दरबारियासभक बैसार बजाओल गेल । बैसारमे नरेश चतुर सहायकक परीक्षणमे सफल होबऽबलाकेँ बहुमूल्य उपहार देबाक घोषणा केलन्हि ।

द्वन्द्व

द्वन्द्व ः नेपाली समाजक प्रभाव विवेचना

द्वन्द्वसँ पहिने

पितृसत्तात्मक स्वरूपमे विकास भेल समाज महिलाकेँ प्रायः दोसर दर्जाक नागरिक जकाँ व्यवहार करैत अछि । नेपाली समाज सेहो ओही प्रवृत्तिक अपवाद नहि अछि । कत्तौ प्रथाक नाममे, कत्तौ संस्कारक नाममे, कत्तौ आस्थाक कारणसँ महिलाक उपर हिंसा, दुव्र्यवहार आ असमान व्यवहार होइत आबि रहल अछि । कत्तौ एक गरिब या विपन्न परिवारक महिला, ओकरा पक्षमे आवाज उठौनिहार कियो नहि रहल साधारण महिलाकेँ डाइनक आरोप लगा कऽ पिटपाट आ हिंसा कएल जाइत अछि । (११)

नेपालक राष्ट्रिय अभिलेखालयमे संरक्षित विद्यापतिक नामक हस्तलिखित ग्रन्थसब

धर्मेन्द्र विह्वल
काठमाण्डूस्थित राष्ट्रिय अभिलेखालयमे एक हस्तलिलित ग्रन्थ शाखा अछि । एकरा धर्मशास्त्र शाखा, ज्योतिष शाखा, दर्शन शाखा आ तन्त्र शाखा सेहो कहल जाइत छैक । एहि शाखामे २४ हजार दू सओ ९६ टा हस्तलिखित ग्रन्थसब संरक्षित अछि । ई ग्रन्थसब ताडपत्र, वसहा कागज, नीलपत्र आदिमे लिखाएल अछि । एहि ग्रन्थसबमे कोनो पूर्ण जीर्ण, किछु अपूर्ण, आ किछु न्यून जीर्ण आ किछु सामान्य अवस्थामे अछि । एहन हस्तलिखित सामग्रीसब एक पृष्ठसँ लऽ कऽ एक हजार दू सओ पृष्ठधरिक अछि । एहने ग्रन्थसबमे किछु ग्रन्थ विद्यापतिक नामक सेहो अछि । विद्यापतिक नामक ई ग्रन्थसब कोनो मैथिली, कोनो नेवारी, कोनो संस्कृत आ कोनो अवहट्ठमे लिखल गेल अछि । मैथिली भाषाक महाकवि विद्यापतिक नामक ई ग्रन्थक संख्या एतऽ बाइस अछि । ई सब विविध विधा आ विषयसँ सम्बन्धित अछि । ई ग्रन्थसबहक एतऽ संक्षिप्तमे चर्चा करबाक प्रयास कएल जा रहल अछि । लेखकक नाम विद्यापति उल्लेख कएल गेल राष्ट्रिय अभिलेखालयमे सुरीक्षत ई हस्तलिखित ग्रन्थसबहक विस्तृत अध्ययनसँ कवि विद्यापतिक सम्बन्धमे आर व्यापक जानकारी प्राप्त कएल जा सकैत अछि ।

मैथिलीका चार कृति

परम्परा निर्वहनबाट उन्मुक्तिको प्रयास

नेपालमा पुस्तक प्रकाशन र अध्ययनको प्रवृत्तिलाई शायद मौलाएकै रुपमा स्वीकार गनुपर्छ । सम्भवतः पाठकको अध्ययन रुझानमा वृद्धि भएरै हाोला पछिल्लो समयमा पुस्तक प्रकाशन प्रक्रियाले गति प्राप्त गरेको छ । र, पुस्तक प्रकाशनको यो क्रम नेपाली भाषामा मात्र होइन अन्य राष्ट्रिय भाषामा पनि बढेको पाइएको छ । यहाँ सन्दर्भ मैथिली प्रकाशनको हो । हालैका महिनामा मैथिली प्रकाशनमा उल्लेख्य वृद्धि भएको छ । कुनैबेला थियो, जब एउटा मैथिली प्रकाशनका लागि महिनौ वर्षौ कुर्नुपर्ने अवस्था थियो । तर पछिल्लो दिनमा यो स्थितिमा सुधार आएको छ । निश्चय पनि प्रविधिको विकासले निकै ठूलो भूमिका निर्वाह गरेको तथ्य स्वीकार गर्नैपर्छ । त्यसैगरी व्यवशायिक सोच र आक्रामक वजार प्रवद्र्धनले पनि निकै ठूलो टेवा पुगेको छ । अलिकति प्रभाव समाजमा आएको खुलापनको पनि हो । परिवर्तित राजनीतिक सोच र शैलीले पनि श्रष्टालाई हौस्याएको हुनुपर्छ । यति हुँदाहुँदै पनि सबभन्दा महत्वपूर्ण कुरा त श्रष्टाको रचनाधर्मिता र क्रियाशीलता नै हो । मैथिलीका लेखकमा पनि रचनात्मकताका साथै तत्परता बढेको छ । पछिल्लो एकवर्षमा मात्र प्रकाशनमा आएको झण्डै डेढ दर्जन कृतिले कम्तिमा यही कुरा प्रमाणित गर्दछन ।

शहीदक सपना आ मधेशीक भूमिका


    नेपालक संविधान लिखबाक दिन क्रमशः लगचियारहल अछि । जँ कोनो विध्नवाधा उपस्थित नहि होउक तँ करिव डेढ मासक समय बाँकी छैक जाहिक भितर संविधान लिखा जेबाक वाध्यकारी अवस्था छैक । सर्वोच्च अदालतक लगातारक आदेश आब संविधानसभाक अवधि बढेबाक अनुमति नहि दैत छैक । मुदा प्रश्न फेरो उएह उठैत छैक जे कि निर्धारित अवधिमे संविधान लिखाएत ? एहिमे विविध स्तरपर शंका उपशंका व्यक्त भऽ रहल अछि जकरा अस्वाभाविक नहि मानल जेवाक चाही । संविधान लिखाएत या नहि से बात तऽ महत्वपूर्ण अछिए । एकरासँगहि संविधान केहन लिखाएत आ केहन लिखल जेबाक चाही से बात बेसी महत्वपूर्ण अछि । ०६२÷०६३ क जन–आन्दोलन आ तकरबादक लगातारक मधेशक दू टा आन्दोलनक मूल्य, मान्यता आ मर्म संविधानलेखनक अन्र्तवस्तु होबाक चाही । एहिबातमे शंका नहि । उपर चर्चा कएल गेल आन्दोलसबहक सम्बन्ध नेपालक नागरिक अधिकार, जात–जातिक परिचय, समानुपातिक विकास आ अवसर, आम जनताधरि संघीय लोकतन्त्रक अनुभूति आ परिवर्तनक संस्थागत सम्वद्र्धन आदिसँ अछि । एहिमेसँ कोनोटा विषय जँ संविधानक अन्तर्वस्तु नहि बनिसकत तँ ओहन संविधान सर्वस्वीकार्य भऽ सकत ताहि बातमे शंका अछि । संविधानमे इएह आ एहने विषय–वस्तु समावेश भऽ सकए आ नेपालक सभ जनताक सहभागिताक आधारपर समतामूलक समाजक निर्माण भऽ सकए सएह आकांक्षा आ विश्वासक आधारपर नेपालक बहुतो सपूतसभ बलिदानी देलाह । आजुक दिनमे ओ सपूत शहीदसभ हमरासभक बीच नहि छथि मुदा हुनकालोकनिक विचार आ दर्शन हमरासभक बीच अछि । आई एकटा बड महत्वपूर्ण प्रश्न हमरासभक सोझाँ ठाढ अछि, शहीदसभ जे अपन भावी पुस्ताक कल्याणवास्ते अपन जीवनक आहुति देलनि हुनकसभक प्रतिएँ हमरासभक कर्तव्य कि होबाक चाही आ हुनकालोकनिकेँ केना सम्मान कएल जेबाक चाही ?

Wednesday, September 11, 2013

हमर तांका


खियागेल छै
लोकक आवरण
अपनहिमे
आरोप निराधार
मुखौटामे जिनगी ।
    (९९)

जल–फूहार
अनुपम सुगंध
मातल मोन
विद्रोह करै अछि
उन्मुक्तिक प्रयास ।
     (१००)

गोनु झाक कथा

पुत्रक नामाकरण

एकसमयक बात अछि । एकराति चारिटा चोर गोनुक घरक भित फोडि भितर पैसिगेल छल । गोनु बाबु ओछाओनपर ओहिना पडल छलाह । निन्द नहि आबिरहल छलनि । चोरसभकेँ भितर पसिते गोनुकेँ भनक पडिगेलनि जे केओ भितर पैसल अछि । गोनुपत्नी सेहो सँगे ओछाओनेपर छलीह । मुदा ओ नहि बुझि सकलीह जे चोरसभ घरभितर पैसिगेल अछि । गोनु घरमे चोर होबाक बात पत्नीकेँ नहि कहलनि, उल्टे पत्नीसँ प्रेमालाप करऽ लगलाह । ओम्हर चोरसभ कौखन गोनुदम्पत्तिकेँ निन्द हएत आ सबकिछुपर हात साफ करब से सोचैत एक कोनमे दुबकल छल ।

Sunday, August 25, 2013

गोनु झाक कथा


  

    पत्नीप्रेम





धर्मेन्द्र विह्वल
एकबेरक बात अछि । गोनुकेँ पत्नीक मोनक बात बुझबाक विचार भेलनि । ओ  मोन चोरेबाक उद्देश्यसँ पत्नीकेँ पुछलखिन–प्रिय, व्यस्तताक कारण आहाँक इच्छासब पूरा नहि भऽ पाबिरहल अछि । हम आहाँकेँ पर्याप्त समय सेहो नहि दऽ पाबिरहल छी । ओ चापलुसीक श्वरमे पत्नीकेँ सम्बोधन करैत बजलाह–आहाँकेँ किछु इच्छा अछि तँ कहू, हम पूरा करबाक प्रयास करब ।
गोनुक बात सुनि पहिने तँ पत्नीकेँ बड आश्चर्य भेलनि । मुदा बादमे ओ स्वयंकँे सम्हारलनि । ओ पतिक बातमे कोनो चातुर्य निहीत होबाक सम्भावना देखलनि । ओ प्रत्यक्षतः बजलीह–आर तँ किछु इच्छा नहि अछि, मुदा........। ओ बातकेँ पुरा नहि कऽ बीचहिमे छोडि देलनि ।
हँ हँ कहू, कोनो संकोचक बात नहि अछि । बाजू, हम अखने पूरा कऽ देब–पत्नीक आधा बातक जवाफ दैत गोनु बजलाह ।
छोडू, नहि कहब । हमर इच्छा अखन नहि पूरा भऽ सकैए–पत्नी कने रभसक श्वरमे बजलीह ।
गोनु कने फूर्ति झाडैत बाजऽ लगलाह–आहाँ बाजु मात्र, हम केहनो असम्भव बात पूरा कऽ कऽ देखा देब । एहिबेर गोनु पत्नीकेँ सेहो पतिक परीक्षा लेबाक विचार भेलनि । एतबए नहि, गोनुक जिद्दक आगाँ केओ नहि टिकि सकैए से बात गोनुपत्नीकेँ छोडि आर के बुझि सकैत छल ? ओ बजलीह–हमरा आई माछ खेबाक मोन भऽ रहल अछि ।
पत्नी कि कि ने कहती से सोचिरहल गोनुकेँ पत्नीक इच्छा बड मामुली बुझेलनि । ओ माछ अनबाक उद्देश्यसँ तत्काल बाहर निकललाह । अबेर भऽ चुकल छल । मछहट्टी बन्द भऽ चुकल होबाक कारणे माछ भेटब सम्भव नहि छल । पत्नीकेँ देल गेल अश्वासन आ अपनाद्वारा झाडल गेल फूर्ति गोनुकेँ आब मोन पडऽ लगलनि । आब खाली हात केना घर जाएब ? ओ बडा भारी संकटमे पडिगेल छलाह ।
गोनु चोट्टहि घर लौटि जाएब सेहो उचित नहि बुझलनि आ आब कतऽ गेल जाए सेहो निर्णय नहि कऽ सकलाह । एतबहिमे हुनका अपन पडोसी परमेश्वर मोन पडलनि । वृद्ध परमेश्वर विमार छल । गोनु परमेश्वरकेँ देखबाहेतु अखनधरि नहि गेल छलाह । अचानक गोनुक मुहँसँ बहरेलनि–वेचारा परमेश्वर निक लोक छल.........। वाक्यो नहि पूरा भऽ पाएल छल कि अचानक एक व्यक्ति गोनुक पँजरामे ढाकी फेँकि पिताजी पिताजी कहि चिचिआए लागल आ हवोडबार भऽ कनैत आगामुहेँ दौगऽ लागल । बादमे गोनु चिन्हलनि–ओ परमेश्वरक बालक घोघना छल । ओ घोघनाकेँ बजौलनि, मुदा गोनुक बात नहि सुनि घोघना गामदिसि दौडऽ लगल । गोनुक बात सुनि घोघनकेँ लगलैक जे ओकर बाबुक मृत्यु भऽ गेल अछि । घोघना ओनाकऽ जे ढाकी फेँकि दौडल छल ताहिबातक पश्चाताप गोनुकेँ छलनि । मुदा आब भइए कि सकैत छल । घोघना तँ ओतऽ सँ निपत्ता जे भऽ चुकल छल ।
गोनु सोचलनि, घर जेबाक बदला ई ढाकी परमेश्वरक घर दऽ आबी । ओ ढाकीदिसि बढलाह । आश्चर्य, ढाकीमे तँ माछ छल । हुनक आँखिमे स्पष्टतः खुसी देखल जा सकैत छल । निचामे खसल सब माछ उठाकऽ गोनु ढाकीमे रखलनि आ ढाकी उघि अपन घरदिसि विदा भेलाह ।
ढाकीमे माछ अनैत गोनुकेँ देखि गोनुपत्नी बड खुसी छलीह । हुनकर खुसीक कोनो सीमा नहि छल । हुनका बुझेलनि जे ठीके पति हुनका बड मानैत छथिन । पत्नी जल्दी–जल्दी माछ बनौलनि । पतिकेँ भोजनक लेल बजौलनि । भोजनलग आबि गोनु पत्नीकेँ कहलनि–एकटा वर्तनमे कने माछ राखि दिऔक । परमेश्वर विमार छथि । कहिओ फुर्सदि नहि भेल जे एकबेर देखिओ अबियैक । परमेश्वरकेँ माछ बड निक लगैत छनि । आई कने हुनको माछ खुआ दियनि । ओ फेर बजलाह–आई पहिने हुनकँे माछ खुआएब तखन अपने खाएब । ओ बजैत जा रहल छलाह–मोनमे आबिगेल तँ बात पूरा कइए दी । हुनका खुऔने अपने खाएब तँ पाप लागत ।
ई बात सुनि गोनु पत्नीकेँ कने वेजाएसेहो लगलनि । हुनका बुझेलनि जे गोनु हुनकासँ बेसी परमेश्वरकेँ मोजर दऽ रहल छथिन । तथापि, पतिक आदेशक ओ अक्षरशः अनुशरण केलनि । एकटा वर्तनमे कने माछ आ झोर राखि पतिक हातमे थमौलनि । दुनु दम्पति माछ लऽ परमेश्वरक घर गेलथि ।
परमेश्वरक घरमे शून्यता पसरल छल । केओ किछु नहि बाजिरहल छल । सभक आँखि देखलासँ बुझाइत छल जे आँखिसबसँ वेश नोर बहल अछि । गोनु मौनता भंग करैत घोघनसँ सम्बोधित होइत बजलाह– घोघन, परमेश्वरकेँ केहन छनि ? तखन बाटमे हम ओते बजौलियह, मुदा उनटि कऽ तकबो नहि केलह, दौडऽ लगलह ।
घोघन किछु नहि बाजल । गोनुक प्रति घोघनक परिवारक रोष स्पष्ट अनुभव कएल जा सकैत छल । गोनु परमेश्वरक लग जा कऽ बजलाह–परमेश्वर, हम तँ आहाँकेँ देखऽलेल आबिए नहि सकलौं । आई घोघनाक कारणे एतऽ आएव सम्भव भऽ सकल । लिअ ई माछ । माछक गरम–गरम झोर सानि भात खाऊ । घोघनक परिवारकेँ आब बात बुझबामे कोनो भांगठ नहि रहिगेल छलैक । कनेकाल विलमि गोनु सपत्नी ओतऽसँ विदा भऽ गेलाह । रातुक अन्हरियामे सेहो गोनुक मुहँक मुस्की अनुभव कएल जा सकैत छल । पत्नीकेँ कने आश्चर्य तँ भेलनि मुदा किछु पुछि नहि सकलीह । घर जा भोजनपर बैसलाक बाद गोनुपत्नी कने साहस बटोरि पतिसँ पुछलनि–परमेश्वर विमार छथि, आहाँ माछ दऽ एलियनि । आहाँक मुहापर मुस्की नाचिरहल अछि । आखिर बात कि अछि ?
गोनु कऽर मुहँदिसि लऽ जाइत बजलाह– माछ बड स्वादिष्ट बनल अछि । अहुँ खाऊ । रहल मुस्कीक बात, तँ सब मुस्कीक रहस्य आहाँ नहि ने बुझबै ।
पत्नी चूप भऽ गेलीह ।  


















Madhesh

मधेश आन्दोलनक मूल्य


   ०६२÷०६३ क जन–आन्दोलनक बाद मधेशमे दू टा आन्दोलन आकार लेलक । आब ई बात नव नहि रहिगेल । ई आन्दोलनसब मधेशक जनताक अधिकार प्रत्याभूतिक दिशामे वेश आश जगौने छल, मुदा आजुक दिनमे जँ मूल्यांकन करबाक बात उठौक तँ उत्तर समुचित ढंगे प्राप्त नहि भऽ सकैत अछि । ई धरातलीय यथार्थ अछि ।  आन्दोलनक मूल्य, मान्यता आ मर्म निश्चितरुपेँ ‘सोराज’क भावनाकेँ वल प्रदान करबामे सक्षम छल । संविधान एकरालेल एक मार्ग भऽ सकैत छल । मुदा एहिखन ई बाट बड कठिनाहसन बुझाइत अछि । एहिबातमे कोनो शंका नहि जे हमरालोकनिक नेतागण जिम्मेबार नहि भऽ सकलाह । आ, एकर परिणाम छैक जे मधेश भूमि अधिकार प्राप्तिसँ निरन्तर विलमिरहल अछि । उपर चर्चा कएल गेल आन्दोलसबहक सम्बन्ध नागरिक अधिकार, जात–जातिक परिचय, समानुपातिक विकास आ अवसर, आम जनताधरि संघीय लोकतन्त्रक अनुभूति आ परिवर्तनक संस्थागत सम्वद्र्धन आदिसँ अछि । एहिमेसँ कोनोटा विषय प्राप्त नहि भऽ सकत तँ ई बुझल जेबाक चाही जे नेतागण स्वयं आन्दोलनक अवमूल्यन कऽ रहल छथि । संविधानमे एहने विषय–वस्तु समावेश भऽ सकए आ मधेशक जनताक सहभागिताक आधारपर समतामूलक समाजक निर्माण भऽ सकए सएह विश्वासक आधारपर बहुतो सपूत बलिदानी देलनि ।


      शहीद शव्दक निरन्तर अवमूल्यन कार्य जारी अछि ।  शहीदक योगदानकेँ नेतागणद्वारा अपना मनोनकुल व्याख्या करबाक अशोभनीय कार्य एखन वेश स्थान लऽ रहल अछि । जे दुखद अछि । एहि काजक हेतु मात्र राजनीतिक नेतासभपर जिम्मेबार थोपि आम जनताक भूमिका पूरा नहि भऽ सकैत अछि । वर्तमान अवस्थाक लेल हम आहाँ सेहो कोनो ने कोनोरुपेँ जिम्मेबार छी । ई बात सभकेँ स्वीकार करहि पडत, हमरालोकनि अपन नेतृत्वपर विश्वास कऽ कानमे तुर–तेल दऽ निचैनसँ सुति रहलहुँ । जाहिमोताविक खवरदारी होबाक चाहैत छल ओहिमे कतहु कोताहि रहिगेल । हमसभ सामान्यरुपेँ सम्पन्न होबऽबला काजसब सेहो नहि कऽ पाविरहल छी । नेता चुनि कऽ अप्पन भूमिका पूरा करबाक बात सोचनाई कतहु ने कतहु गलत छल । चुनलाहा नेताकेँ जिम्मेबार बनेबाक लेल जते दवाव सिर्जना कएल जेबाक चाहैत छलै ओते कार्य आम आदमीसँ नहि भऽ सकलैक । ई सत्य अछि ।  आई मधेशकेँ मूल्यांकन करहि पडत जे आन्दोलनक बादक मुख्य उपलब्धि कि भेल ? देशक अवस्थाअनुसार जँ विश्लेषण कएल जाए तँ देशकेँ कानुनक रुपमे सूचनाक हकसम्बन्धी ऐन–२०६४ भेटलैक । जे बहुत पैघ उपलब्धि छल । एहि उपलब्धिमे मधेशकेँ सेहो हिस्सा छैक । तकबाक चाही । एकरा छोडि नीतिगतरुपेँ खास उपलब्धि तकनाई कठीन अछि । गणतन्त्रप्राप्ति निश्चितरुपेँ एक बहुत पैघ बात छल मुदा गणतन्त्रप्राप्तिक बाद मधेशक ताहिमोताविकक उपलब्धिध भेटलैक कि नहि ? ई विषय वहसक सन्दर्भ भऽ सकैत अछि । गणतन्त्र प्राप्तिक बाद कोनो उपलब्धिए नहि भेलै सेहो बात नहि छैक । पहिचान संस्थागत होबाक दिशामे सन्तोष कएल जा सकैत अछि । संघीयता अपरिहार्य भऽ गेल । समावेशीक मुद्दा एकटा स्वरुप ग्रहण केलक । ई सब बात सही अछि । मुदा जखन जनताक दृष्टिए किछु देखनगर बातक अपेक्षा कएल जाइत छैक ताहिखन बहुत राश बात निराशापर जा अटकि जाइत छैक । 

आन्दोलनसबहक एहि पृष्ठभूमिमे स्वाभाविकरुपेँ मधेशक भावनाक प्रतिनिधित्वक बात महत्वपूर्ण अछि । मधेश आ मधेशवासीक अधिकार आ पहिचानक खातिर मधेशमे संघर्षक एक पूरान परम्परा अछि । ०६३ आ ०६४ क आन्दोलन एहि संघर्षक उत्कर्ष अछि ।  सत्य तीत होइत छैक ।  आई मधेशक सपना साकार करब आ आकांक्षा पूरा करबाक बातकेँ राजनीतिक स्वार्थसँ जोडल जा रहल छैक । आन्दोलनक मूल्य आ मान्यताकेँ भजेबाक काज भऽ रहल अछि । निश्चय ई बात दुखदायी अछि । बात कडू आ तीत अछि । मुदा सत्य इएह छैक । राजनीतिक दल मधेशकेन्द्रीत नहि अछि ओकरासबहक लेल मधेश, मधेशी आ मधेशक जनता  सम्भवतः आत्मीय नहि अछि । निकटताक सम्बन्ध स्थापित नहि अछि । आन दल तँ आन, मुदा जे दल मधेशक कायापलटक वचनवद्धताक सँग देखबामे आएल छल, विगतक प्रदर्शनक आधारपर तकरोसबपर आशंका करबाक पर्याप्त आधार छैक । नेता आ पछिलगुवासभक उन्नति जाहिरुपमे भेलैक ताहिअनुपातमे एतहुका आम आदमीकेँ सम्बोधन नहि भऽ सकलैक । ई बात असत्य नहि अछि । मधेशकेन्द्रीत आ मधेशवादीक रुपमे दावी करैत आविरहल दलक नेताक कर्तव्य मधेश स्वार्थअनुकूल नहि हएव दुःखक बात अछि । आई मधेशकेन्द्रीत नेतासभ अपन दलीय स्वार्थसँ वशिभूत भऽ आन्दोलनकेँ अपनाअनुकूल व्याख्या करबाक धृष्टता कऽ रहल छथि । एतबए नहि आई मधेश कोनो खास वर्ग, पक्ष, समूह, जाति आ वादमे बँटबाक खतरा सेहो उत्पन्न भऽ गेल छैक, जे मधेशक भविष्यक लेल चिन्ताजनक बात अछि । अखनो विलम्व नहि भेल अछि, सभकेओ मिलि कऽ जिम्मेबारीक बोध कऽ दायित्व निर्वहनक प्रयास करी तँ उपलब्धि प्राप्त कएल जा सकैत अछि ।

Saturday, August 24, 2013

My Tankas


जिनगीभरि
एकटा ऊहापोह
नै जी सकलौँ,
कहाँ छै आशासब
सबकिछु भ्रम छै १
(१)    सागरबीच
काँकोड़क बस्ती छै
समस्याग्रस्त
सागरक थपेडकेँ
झकझोड़ि दैत छै १
(२)